- बसंत पंचमी पर सांदीपनि आश्रम में विद्यारंभ संस्कार, भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षास्थली में गूंजे पहले अक्षर
- बसंत पंचमी पर महाकाल दरबार पीले रंग में सजा, आज से होली तक रोज अर्पित होगा गुलाल
- महाकाल मंदिर में गूंजा ‘जय श्री महाकाल’, भस्म आरती में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब; शेषनाग मुकुट और रजत मुण्ड माला में सजे बाबा महाकाल
- बसंत पंचमी पर वासंती रंग में रंगेगा महाकाल मंदिर, भस्म आरती से होगी शुरुआत; सांदीपनि आश्रम में भी होंगे विशेष धार्मिक आयोजन!
- वीरभद्र जी के कान में स्वस्ति वाचन के बाद ली गई आज्ञा, पंचामृत अभिषेक और भस्म अर्पण के साथ साकार रूप में भगवान ने दिए दर्शन
पहली बार अष्टमी पर चौबीस खंभा माता को चढ़ी मदिरा, शुरू हुई नई परंपरा
उज्जैन | चैत्र की महाअष्टमी पर रविवार को पहली बार चौबीस खंभा माता को मदिरा की धार चढ़ी। श्री निरंजनी अखाड़े के महंत रवींद्रपुरी महाराज, ऊर्जा मंत्री पारस जैन और पूर्व विधायक राजेंद्र भारती ने मातारानी को मदिरा का भोग लगाकर नगर पूजा की शुरुआत की।
पूजा सुबह 8 बजे हुई। मां महालया और महामाया के पूजन के लिए साधु-संत सहित आमजन बड़ी संख्या में मंदिर पहुंचे। उन्होंने मातारानी को चुनरी ओढ़ाई, बड़बाकल का भोग लगाया और देश में सुख-समृद्धि की प्रार्थना की। इसके बाद हरसिद्धि, गढ़कालिका, नगर कोट, भूखी माता, बिजासन माता सहित 40 मंदिरों में पूजन हुआ।
करीब 26 किमी की यात्रा कर पूजन विधि 12 घंटे में पूर्ण हुई। मालूम हो कि अब तक नगर पूजा की परंपरा शारदीय नवरात्रि में ही थी, मगर इस बार निरंजन अखाड़े के महंत की इच्छा पर चैत्र की नवरात्रि में भी यह पूजन किए जाने की शुरुआत की गई। रविवार की पूजा में बस फर्क था तो इतना था कि पूजा में कलेक्टर या उनका कोई प्रतिनिधि शामिल नहीं हुए।